अब नगर निगम खुद के वित्तीय बांड जारी कर फंड का कर सकते हैं इंतजाम, रेटिंग एजेंसी का किया चयन

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देहरादून। उत्तराखंड के नगर निगम अब खुद के वित्तीय बांड जारी कर, फंड का इंतजाम करवा सकेंगे। शहरी विकास विभाग ने इस पर सैद्धांतिक सहमति देते हुए, निकायों की वित्तीय स्थिति का आकलन करने के लिए रेटिंग एजेंसी का चयन कर लिया है। इसके बाद निकायों की सरकार पर वित्तीय निर्भरता समाप्त हो जाएगी।
प्रदेश में नगर निकाय विकास कार्य से लेकर कर्मचारियों के वेतन और पेंशन के लिए अभी पूरी तरह प्रदेश सरकार पर निर्भर हैं।
हाउस टैक्स के साथ ही आय के तमाम साधन होने के बावजूद वित्तीय प्रबंधन न होने के कारण निकाय आर्थिक रूप से कमजोर बने हुए हैं। इसलिए सरकार बड़े नगर निगमों को बांड जारी कर बाजार से फंड उठाने की अनुमति देने जा रही है। जैसे अन्य बड़े सरकारी निगम करते हैं। सरकार कुछ शर्तों के साथ इस की गारंटी लेगी। देहरादून, हरिद्वार, रुड़की, कोटद्वार, ऋषिकेश, काशीपुर, रुद्रपुर और हल्द्वानी नगर निगम से इसकी शुरुआत की जा रही है।
इस आधार पर होगी रेटिंग रेटिंग एजेंसी नगर निगमों की बिल्डिंगों, जमीनों, हाउस टैक्स, विज्ञापन शुल्क और अन्य साधनों से होने वाली आय के साथ ही कर्मचारियों के वेतन, पेंशन पर आने वाले खर्च, बकाया आदि का मूल्यांकन कर प्रत्येक निगम को अलग -अलग रेटिंग देगी।
बी प्लस प्लस रेटिंग वाले निकाय को बाजार से फंड जुटाने की अनुमति दी जाएगी। कुछ इसी तर्ज पर आम व्यक्ति होम लोन या अन्य तरह का लोने के लिए सिबिल रिपोर्ट की मदद लेता है।
हालांकि पूर्व में एक बार देहरादून नगर निगम की रेटिंग की गई थी, तब देहरादून निगम की रेटिंग अच्छी आने के बावजूद निगम इस सुविधा का लाभ नहीं उठा पाया है।
पिछले साल ही लखनऊ और गाजियाबाद नगर निगम ने बांड से पैसा उठाना शुरू किया है। जबकि अहमदाबाद जैसे कुछ निकाय लंबे समय से बांड के जरिए ही फंड का इंतजाम करते हैं। सरकार की ओर से इसका मूल्यांकन करवाया जा रहा है।

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